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Key points of trading


  • 1.   जितने भी profitable सिस्टम है सब के सब ट्रेंड्स पर काम करते है जैसे जैसे प्राइस बदती है ट्रेंड बनता चला जाता है |
  • 2.   ट्रेंड फोल्लोविंग एक सिंपल यूनिवर्सल लॉ है जिसे सबको फॉलो करना पड़ता है |
  • 3.   किसी को नहीं पता की मार्किट कितना ऊपर या फिर नीचे जायेगा | किसी को नहीं पता कि मार्किट कब मूव करेगा | आप past  को बदल नहीं सकते और future का पता नहीं लगा सकते |
  • 4.   कॉमन सेंस सही तरीका नहीं है मार्किट में ट्रेड करने का, आपको सीख कर ही ट्रेड करना चाहिए |
  • 5.   कोई भी हमेशा सही नहीं हो सकता मार्किट में | कोई भी हमेशा पैसा नहीं कम सकता मार्किट से | ट्रेंड फोल्लोवेर्स भी हमेशा प्रॉफिट में नहीं होते है | अगर आपके लोस्सेस नहीं है तो आप रिस्क नहीं ले रहे है और अगर आप रिस्क नहीं ले रहे हो आप कभी जीत नहीं सकते ट्रेडिंग मार्किट में |
  • 6.   स्टॉक प्राइस ऊपर, नीच कभी भी जा सकता है या फिर मार्किट sideways हो सकता है | हमको हमेशा हर चीक के लिए तेयार रहना पड़ेगा |
  • 7.       जो भी ट्रेड आपने लिया हा उसको एन्जॉय करो, ज्यादा wait मत करो अपना प्रॉफिट लो और बाहर निकलो |
  • 8.   emotions को बीच में मत लेकर आओ , ये होगा , वो होगा , ये सब यहाँ पे काम नहीं करता, स्क्रीन पे देखो जो हो आहा है वो ही सच है बस |

Umbrella term का मतलब होता है कि जहाँ  पर investors बहुत सारे exchanges के बीच मे equitues को buy या फिर sell करते है या फिर कम्पनीज अपने शेयर पब्लिक में इशू करती है ताकि पब्लिक द्वारा उन्हें खरीदा या फिर उनमें इन्वेस्ट किया जा सके । S&P 500 और nasdaq दुनिया मे सबसे बड़े है और भारत मे सबसे बड़े एक्सचेंज bse और nse है ।
95% ट्रेडर्स लोस करते है क्योंकि उनको यही नही पता कि मार्किट में सीखना क्या है ।

3 मोस्ट इम्पोर्टेन्ट चीजे है

1st इस price action 

इसमे आप पुराने और current प्राइस के बेस पर ये जानते है कि फ्यूचर में stock का क्या प्राइस होने वाला है ।

दूसरा है

आपको candlstick सीखना पड़ेगा । candlestick आपको ये बताता है कि ट्रेड कब चेंज होने वाला है या फिर ट्रेड कब तक continuation में रहेगा ।

तीसरा है

आपको buyers और selers volume को पता करना पड़ेगा मतलब स्टॉक को खरीदने वाले कितने लोग बैठे हुए है और स्टॉक को बेचने वाले कितने लोग बैठे हुए है । अगर खरीदने वाले ज्यादा है तो stock के ऊपर जाने की संभावना ज्यादा है और अगर बेचने वाले ज्यादा है तो stock के नीचे गिरने की संभावना है । 

जब आप इन तीनो को combine करेंगे तो आपको पता चलेगा कि मार्किट में ट्रेड कैसे करना है और हां risk management हमेशा याद रखे।

और सीखने के लिए हमारे telegram channel से जुड़ सकते है ।
Telegram @stoplostrade

Emergency फण्ड में रखे एक साल के वेतन के बराबर पैसा, जरुरत से ज्यादा बचत न करें 


दिग्गज निवेशक वारेन बफेट ने कहा है, खर्च करने के बाद जो बचता है उसे बचाये नहीं, बल्कि बचत के बाद जो बचता है उसे खर्च करें | इसके पीछे विचार यह है कि खर्च करने से पहले बचत करें | जैसे ही आपकी मासिक सैलरी आये उसका कम से कम 10 - 20% अलग रख दें | एक व्यक्ति को बचत करने में औसतम 15-20 साल का समय लग जाता है | ऐसे में युवाओं को फाइनेंस की समझ होनी जरुरी है | जो युवा अपनी पहली नौकरी कर रहे है उनके लिए फाइनेंस मैनेज करना मुश्कल होता है | वे या तो अपनी पूरी आय खर्च कर देते है | लेकिन यह सही तरीका नहीं है | सबसे पहले हेल्थ insurance में निवेश करें | इसके बाद टर्म insurance में निवेश करें | आमतौर पर करियर की शुरुआत में प्रोफेशनल, टर्म insurance को प्राथमिकता नहीं देते है लेकिन इसमें निवेश करने से आपका भविष्य सुरक्षित हो सकता है | 


EMI पर कुछ भी खरीदने से बचे 


इसके अलावा बचत बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है खर्चे काम करना | हालाँकि यह सलाह काफी बार दी जाती है | लेकिन प्रोफेशनल्स इसे गम्भीरता से नहीं लेते और फिजूल के खर्चे करने लगते है | इससे बचे के लिए कभी कोई सामन EMI पर ना खरीदें | यह आपकी बचत बढ़ने से रोकता है क्योंकि इसमें आपको वस्तु के मूल्य से ज्यादा भुगतान करना पड़ता है | सिर्फ घर खरीदते वक्त ही EMI फायदेमंद होती है | इस दौरान अपनी बचत का 15-20 प्रतिशत डाउन पेमेंट के रूप में भुगतान करें और बाकी का भुगतान लोन का उपयोग कर किया जा सकता है | 


Mutual Fund में निवेश करें 


इसके बाद एक इमरजेंसी फण्ड बनाये जिसमे एक साल के वेतन के बराबर पैसा होना चाहिए | फर इसे फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश करें | यह फण्ड आपातकाल स्थिति में आपके काम आएगा | इमरजेंसी फण्ड आपके लिए सेफ्टी नेट की तरह काम करता है | आप चाहें तो इसमें 3-6 महीने की सैलरी बचाकर भी रख सकते है | इसे एक बीमा पालिसी के रूप में ले सकते है | किसी कंपनी को प्रीमियम का भुगतान करने के बजाये आप स्वयं को वह पैसा दे रहे है जिसका उपयोग आप भविष्य में कर सकते है | इसके बाद अगर आपको लगता है की आप और अधिक बचत कर सकते है तो इंडेक्स आधारित म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना शुरू करें | उदहारण के तौर पर अगर आप कार खरीदने विदेशी छुट्टी पर जाने के लिए बचत करना चाहते है तो इसके लिए 5 साल का लक्ष्य रखे और लौ रिस्क म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करें | अगर आप चाहें तो इसमें फिनांशियल एडवाईज़र की भी मदद ले सकते है | 


और ज्यादा जानने के लिए अभी फॉलो करें | 



शेयर बाजार की तेजी के दौर में मल्टी एसेट फण्ड निवेशकों के लिए फायदेमद 


शेयर बाजार में तेजी के दौरान निवेशकों के लिए मल्टी एसेट फण्ड फायदेमंद हो सकते है | दरअसल, यह पोर्टफोलियो को अनुकूलित और बेहतर जोखिम-समायोजित रेतुर्न का विकल्प है | बाजार विशेषज्ञ मनीष कुमार अग्रवाल का कहना है की मल्टी एसेट निवेश ऐसी रणनीति है, जिसमे इक्विटी, निश्चित आय,रियल एस्टेट,कमोडिटी और अन्य परिसम्पति वर्गों के मिश्रण में निवेश शामिल है | इसका लक्ष्य विविध्कृत पोर्टफोलियो बनाना है, जो जोखिम को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करते हुए स्थिर रिटर्न दे सके | हालाँकि इस श्रेणी में कई फण्ड है | लेकिन आईसीआईसीआई पप्रूडेंशियल फण्ड एसेट फंड ने लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए एक,तीन और 10 साल में बेहतर रिटर्न दिया है | उन्होंने कहा की आम आदमी के लिए विभिन्न सम्पति वर्ग में निवेश का आसान तरीका मल्टी एसेट फंड है | यह फंड कम से कम तीन या अधिक परिसम्पति वर्गों में निवेश करते है | 

इनमे इक्विटी, ऋण और कमोडिटी शामिल है | यह फंड पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा इंवीट और रिट जैसे परिसम्पति वर्गों में भी निवेश करते है | मल्टी एसेट निवेश का जब एक परिसम्पति वर्ग ख़राब प्रदर्शन करता है, तो अन्य वर्ग स्थिरता या बेहतर प्रदर्शन कर सकते है | इससे समग्र पोर्टफोलियो जोखिम काम हो जाता है | वहीँ, मल्टी एसेट परिसम्पति पोर्फोलिओ बेहतर जोखिम प्रबंधन को सक्षम बनाता है | 

इंफ़्रा बांड -  लम्बी अवधि के लिए FD से बेहतर सुरक्षित निवेश 

इंफ्रास्ट्रक्चर बांड इंफ़्रा प्रोजेक्ट के लिए पैसे जुटाने के लिए सरकार या प्राइवेट कम्पनिया जारी करते है | ये बैंक एफडी की तरह निवेश के सबसे सुरक्षित साधनों में एक है | रिटर्न भी बेहतर है | मसलन SBI के इंफ़्रा बांड कूपर रेट 7. 54 % है | जानते है कि रिटेल निवेशकों के लिए ये कितना सही है | 


सरकार के बांड बेहतर 


इंफ्रास्ट्रक्चर बांड या तो सरकार जारी करती है या कॉर्पोरेट | सरकारी इंफ़्रा बांड बेहतर होते है क्योंकि सरकार की मजबूत साख के कारण ये काम जोखिम वाले निवेश की पेशकश करते है | कॉर्पोरेट इंफ़्रा बांड कुछ ज्यादा जोखिम उठाते है, लेकिन इनका रिटर्न भी कुछ ज्यादा होता है | 


10 - 15 साल का निवेश 


इंफ़्रा बांड आमतौर पर 10 - 15 साल या इससे भी ज्यादा समय के लिए जारी किये जाते है | ऐसे बांड जारी करने वाली कुछ संस्थाएं अतिरिक्त आश्वासन के लिए गारंटीकृत बायबैक विकल्प भी देते है | यानी जरुरत पड़ने पर आप इन्हे वापस कर सके है | 


इंफ़्रा बांड किस तरह के निवेशकों के लिए 


आय के विश्वस्तरीय स्त्रोत की तलाश कर रहे निवेशकों के लिए इंफ़्रा बांड बेहतर विकल्प है | बैंक अपनी पूंजीगत जरूरतें पूरी करने के लिए भी बांड जारी करते है | इनकी ब्याज दर तय होती है | मेच्योरिटी अवधि पूरी होने पर निवेशकों को मूल राशि और कूपन का फाइनल पेमेंट मिलता है | इन बांड्स को क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां रेटिंग्स देती है | AAA रेटिंग अच्छी मानी जाती है | 

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